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Showing posts from January, 2019

बक्रोक्ति का शो केस

#बक्रोक्ति_का_शो_केस...                                   ©® Munna Kumar शब्दों के ढ़ेर में सुलगता मैं जब कागजों पे बिखरता हूँ तो कई रूहों की सिसकियां मेरे लेखनी से टकराकर मुझे हर वक्त उद्वेलित करती है शहरी गोधूलि के सूर्यास्त का रोमांच गजब का भभका पैदा करता रहा है हवाओं में ढ़लते सूरज की नवपुल्कित रोशनी में पैदा होती मानवीय हवस की बक्र रेखायें चित्रपट रंगोली की गणित में उलझता मानव मन जब मृदंगित होकर बदचलनी से सरोबार अपने-अपने चेहरों के बनावटी मुखौटों को जयरामपेशा औरतों के शरीर में उगे खूंटी पे टांग रंगीन इच्छाओं की पूर्ति में मस्त हो जाता है तब ये कवि मन विकल हो सरल रेखाओं के नीचे अक्षरों के तांडव नृत्य से बक्रोक्ति का "शो केस" सजा उसे सरे बाजार करता है,

स्वास्तिक चिह्न का ठप्पा

#स्वास्तिक_चिह्न_का_ठप्पा...                                       ©® Munna kumar हंगामा मत करो  कुछ नहीं फर्क पड़ेगा  आ जाओगे सौ दो सौ की जमात में कभी बाजार बन्द कराओगे  कभी चक्के जाम करोगे  कुछ कोरे आश्वासनों के बाद अपना और देश समाज का  एक अमूल्य दिन बर्बाद कर फिर हँसते गाते हुल्लड़ मचाते  घर चले जाओगे  तुम्हारी मांगे पन्नों में समेट कर  दफ्तर के काले दराजों में धकेल दी जायेंगी और तुम्हारी फड़कती भुजायें  फिर कई टेबलों से सरकती हुई अनगिनत ठोकरें खायेगी  जहां दिवाल पे टँगे गांधी जी के  आदमकद कलेंडर के नीचे गांधी जी के चलंत फ़ोटुओं के  मोटे बंडल की ही डिमांड की जायेगी  अखबारों पे छपे मोटे-मोटे काले अक्षरों में सरकार की प्रगति की गाथाओं का इश्तेहार  देश का बदलता तस्वीर  बढ़ता जी डी पी  बढ़ता आयात और आद्योगिक क्रांति  तुम्हें गौरवांवित करेंगे  और फिर तुम...

नंगे सच

#नंगे_सच...                  ©®Munna Kumar चल हठ मत कर मेरे शब्दों के पीछे के नंगे सच का कैफ़ियत जानने को कोई अचंभित नहीं है यहां अब तो आदत सी हो गयी है संसद से सड़कों तक सबों को कत्ल, भ्रष्टाचार, बलात्कार और नंगई की खबरें हर लम्हे पढ़-पढ़ के... जब कभी सुनता हूँ देखता हूँ संसद की सरगर्मियां तो महसूसता हूँ कितने अंतर हैं उन चेहरों और उस पर उग आये मुखौटों पे कभी कभी तो खीज उठता हूँ कि खेंच कर लगा दूँ दो थप्पड़ और बिस्तर पे लहुआलोट पड़े उनके चेहरों को लाकर चस्पां कर दूं उनके कंधों पे व्यभिचार गुजरे जमाने की बात थी अब ये सामान्य सी बात है वो जानती है कुछ मुश्किल नहीं है सब कुछ पच जाता है जैसे कागज पे लयबद्ध अक्षरपात के बाद सुंदर कविता बनती है वैसे ही हर गर्भपात के बाद लड़की स्त्री बनती है

अतृप्तियाँ

#अतृप्तियाँ...                    ©® Munna Kumar अतृप्तियाँ और दिनोदिन बढ़ता दौलत का आदमकद प्यास कुछ यूं पल-पल कि खुद से समझौता कर अंतरात्मा को एड़ियों से देती मसल इस छीना झपटी में टूट पड़े है आकाश के हजारों तारें और नित्य चाँद को खुरच-खुरच निचोड़ रहें है पूरा आसमान और सजा रहे हैं उन्हें चंद तिजोरियों में उन छे इंची बीमारू चेहरों की शिकन नहीं पढ़ी जा सकती जो कि उतारू हैं एक अंजुली में उलट देने को ये आकाश खुद का उच्च्छास लक्ष्यविहीन हो लोगों का भटकाव ठोक-ठोक कर तलवों पे नाल क्षत-विक्षत कर रहा स्वास्तिक चिह्नों के निशान

आस्तीन के सांप

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो आप के आस्तीन में अपना बन कर रहते है और मौका पाते ही डस कर आपको सीधा उपर पहुँचा देते है... तो आइए आज आप सबों को बताता हूँ आस्तीन के सापों की कुछ विशेषताएं... ये सांप दिखने में बिल्कुल ही हम सभी सभ्य आदमी जैसे ही होते हैं लेकिन उनका व्यवहार हम सीधे-साधे लोगों से काफी अलग होता है। देख सुन समझ कर हम उन्हें तब तक पहचान नहीं पाते हैं जब तक वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो जाते हैं, और बहुत बार तो ऐसा भी होता है कि धोखा खा चुकने के बाद भी उनका असल चेहरा को न हम परख पाते है और न ही ये दुनिया.... वह अक्सर ज्यादा बातें करना पसंद नहीं करते हैं वे बिल्कुल ही नाप तौल कर सधे हुए से पेश आते हैं। इनमें भावनाएं ऐसी होती हैं जिससे वे खुद को आपका एकलौता हमदर्द साबित करते हैं और व खुद को सच्चा दिखाने के लिए और लोगों का भरोसा जीतने के लिए सोशल व्यवहार की जबरदस्त एक्टिंग करते हैं। जब भी हम इनसे मिलते हैं इनकी असल वास्तविकता से कभी भी रु-ब-रु नहीं हो पाते हैं। ऐसे आस्तीन के सांप बिना किसी ग्लानि के आपको नुकसान पहुंचाते हैं। सम्बन्ध, भरोसा और प्यार इनके अचूक हथियार होते हैं।...