नंगे सच

#नंगे_सच...
                 ©®Munna Kumar

चल हठ मत कर
मेरे शब्दों के पीछे के नंगे सच का
कैफ़ियत जानने को
कोई अचंभित नहीं है यहां
अब तो आदत सी हो गयी है
संसद से सड़कों तक
सबों को
कत्ल, भ्रष्टाचार, बलात्कार
और नंगई की खबरें
हर लम्हे पढ़-पढ़ के...

जब कभी सुनता हूँ
देखता हूँ
संसद की सरगर्मियां
तो महसूसता हूँ
कितने अंतर हैं
उन चेहरों और उस पर
उग आये मुखौटों पे
कभी कभी तो खीज
उठता हूँ कि
खेंच कर लगा दूँ
दो थप्पड़ और
बिस्तर पे लहुआलोट पड़े
उनके चेहरों को लाकर
चस्पां कर दूं
उनके कंधों पे

व्यभिचार
गुजरे जमाने की बात थी
अब ये सामान्य सी बात है
वो जानती है
कुछ मुश्किल नहीं है
सब कुछ पच जाता है
जैसे कागज पे
लयबद्ध अक्षरपात के
बाद सुंदर कविता बनती है
वैसे ही हर गर्भपात के
बाद लड़की स्त्री बनती है

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